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भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन (TRICK)

                               
भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन (TRICK)

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन तथा उनसे सम्बंधित महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित प्रश्न सभी प्रतियोगिता परीक्षाओ में पूछे जाते है, इसी को ध्यान में रखते हुए मैने आज दिनांक 09/12/2015 को TRICK बनाई है उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आयेगी।

भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन : क्रमानुसार

TRICK-"Europe(यूरोप) Ka(का) PEDA (पेड़ा) DE(दे) FIR(फिर) SWAD(स्वाद) बताऊंगा"
Note : इस ट्रिक में भारत में  यूरोप की कम्पनियों के आगमन का नाम क्रमानुसार है किसी भी ट्रिक को याद रखने के लिए उसे किसी घटना में जोड़कर याद करने से वही आपको आसानी से  याद हो जायेगी, ध्यान दे एक व्यक्ति मिठाई की दुकान पर गया दुकानदार ने कहा आप यूरोप का पेडा ले लीजिये बहुत अच्छा है तो खरीददार व्यक्ति उसे कहता है की पहले स्वाद टेस्ट करूँगा फिर खरीदुंगा अब आप इस ट्रिक को एक बार पुनः पढ़े आपको आसानी से याद हो जायेगी।

ट्रिक का विस्तृत्व रूप :
Europe ka = Europe+ka
1. Europe+ka-यूरोपीय कम्पनी का भारत में आगमन
PEDA = P+E+DA
1. P-पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कम्पनी (1498 ई.)
2. E-अंग्रेजी (English) ईस्ट इंडिया कम्पनी
(1600 ई.)
3. DA-डच ईस्ट इंडिया कम्पनी (1602 ई.)
DE FIR SWAD = DE+FIR+SWAD
4. DE-डैनिश ईस्ट इंडिया कम्पनी (1616 ई.)
5. FIR-फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कम्पनी (1664 ई.)
6. SWAD-स्वीडिश ईस्ट इंडिया कम्पनी (1731 ई.)
बताऊंगा-silent

महत्त्वपूर्ण तथ्य :
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1. 20 मई, 1498 ई. में वास्कोडिगामा ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट बंदरगाह पहुंचकर भारत एवं यूरोप के बीच समुद्री मार्ग की खोज की।
2. 1505 ई. में फ्रांसिस्को द अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया।
3. 1509 ई. में अलफांसो द अल्बुकुर्क भारत में पुर्तगालियों का वायसराय बना।
4. अल्बुकर्क ने 1510 ई. में बीजापुर के युसुफ आदिल शाह से गोवा को जीता।
5. पुर्तगालियों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी कोचीन में खोली।
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6. कारनेलिस डहस्तमान 1596 ई. में भारत आने वाला प्रथम डच नागरिक था।
7. डचों का भारत में अंतिम रुप से पतन 1759 ई. को अंग्रेजों एवं डचों के मध्य हुए वेदरा युद्ध से हुआ।
8. 31 दिसंबर, 1600 ई. इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकार पत्र प्रदान किया।
9. प्रारंभ में ईस्ट इंडिया कंपनी में 217 साझीदार थे और पहला गवर्नर टॉमस स्मिथ था।
10. मुगल दरबार में जाने वाला प्रथम अंग्रेज कैप्टन हॉकिंस था जो जेम्स प्रथम के राजदूत के रुप में 1609 ई. में जहांगीर के दरबार में गया था।
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11. 1615 ई. में सम्राट जेम्स प्रथम ने सर टॉमस रो को अपना राजदूत बनाकर मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में भेजा।
12. अंग्रेजो की प्रथम व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) सूरत में 1608 ई. में खोली गयी।
13. 1611 ई. में दक्षिण पूर्व समुद्रतट पर सर्वप्रथम अंग्रेजो ने मुसलीपट्टनम में व्यापारिक कोठी की स्थापना की।
14. 1661 ई. में इंग्लैंड के सम्राट चार्ल्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाल की राजकुमारी केथरीन से होने के कारण चार्ल्स को दहेज के रूप में बम्बई प्राप्त हुआ था। जिसे उन्होंने 10 पौंड के वार्षिक किराये पर ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया।
15. 1699 ई. में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने तीन गांव  सुतानुती, कालीघाट एवं गोविंदपुर की जमींदार और 1200 रुपए भुगतान कर प्राप्त की और यहां पर फोर्ट विलियम का निर्माण किया। कालांतर में यही कलकत्ता  नगर कहलाया, जिसकी नींव जॉर्ज चारनौक ने रखी।
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16. भारत में फ्रांसीसियो की प्रथम कोठी फैंको कैरो के द्वारा सूरत में 1668 ई. में स्थापित की गयी।
17. 1674 ई. में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडिचेरी की स्थापना की।
18. प्रथम कर्नाटक युद्ध 1746-48 ई. में आस्ट्रिया के उत्तराधिकारी युद्ध से प्रभावित था। 1748 ई. में हुई
ए-ला-शापल की संधि के द्वारा आस्ट्रिया का उत्तराधिकार युद्ध समाप्त हो गया और इसी संधि के तहत प्रथम कर्नाटक युद्ध समाप्त हुआ।
19. दूसरा कर्नाटक युद्ध 1749-1754 ई. में हुआ। इस युद्ध में फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की हार हुई उसे वापस बुला लिया गया और उसकी जगह पर गोडेहू को भारत में अगला फ्रांसीसी गवर्नर बनाया गया। पांडिचेरी की संधि (जनवरी, 1755 ई.) के साथ युद्धविराम हुआ।
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20. कर्नाटक का तीसरा युद्ध 1756-1763 ई. के बीच हुआ जो 1756 ई. में शुरू हुए सप्तवर्षीय युद्ध  का ही एक अंश था। पेरिस की संधि होने पर यह युद्ध समाप्त हुआ।
21. 1760 ई. में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वांडिवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियो को बुरी तरह हराया।
22. 1761 ई. में अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसीयों से छीन लिया।
23. 1763 ई. में हुई पेरिस संधि के द्वारा अंग्रेजो ने चंद्रनगर को छोड़कर शेष अन्य प्रदेशों को लौटा दिया, जो 1749 ई. तक फ़्रांसीसी कब्जे में थे, ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसियो के कब्जे में रहे।


-By Singh

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