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इतिहास : 4 बौद्ध संगीति/शासनकाल/स्थान/अध्यक्ष (TRICK)

इतिहास : 4 बौद्ध संगीति/शासनकाल/स्थान/अध्यक्ष (TRICK)
बौद्धधर्म में 4 बौद्ध संगीति हुई थी। यह किस समय, किसके शासनकाल में, किस स्थान और इनके अध्यक्ष कौन थे इन सभी को याद करने के लिए मैने आज दिनांक 20/12/2015 को TRICK बनाई है।

TRICK-"आज राम, कल वैशाली सब आपके मत द्वारा कनकवन में अब बौद्ध सभा करेंगे"

NOTE : इस ट्रिक में चार बौद्ध संगीतियाँ 1,2,3,4  क्रमानुसार है। ध्यान रहे जब ट्रिक का विच्छेदन किया जाता है तो पहला पद/शब्द शासनकाल, दूसरा पद/शब्द स्थान, तीसरा पद/स्थान अध्यक्ष का नाम व्यक्त करेगा।

ट्रिक का विस्तृत्व विवरण :
[1]. प्रथम बौद्ध संगीति (483 ई.पू.)
आज राम = आज+रा+म
1. आज-अजातशत्रु (शासनकाल)
2. रा-राजगृह (स्थान)
3. म-महाकश्यप (अध्यक्ष)

[2]. द्वितीय बौद्ध संगीति (383 ई.पू.)
कल वैशाली सब = कल+वैशाली+सब
1. कल-कालाशोक (शासनकाल)
2. वैशाली-वैशाली (स्थान)
3. सब-सबाकामी (अध्यक्ष)

[3]. तृतीय बौद्ध संगीति (255 ई.पू.)
आपके मत = आ+पके+म+त
1. आ-अशोक (शासनकाल)
2. पके-पाटलिपुत्र (स्थान)
3. म+त-मोग्गलीपुत्त तिस्स (अध्यक्ष)
द्वारा-silent

[4]. चतुर्थ बौद्ध संगीति (ई. की प्रथम शताब्दी)
कनकवन में अब = कन+क+वन+में+अ+ब
1. कन-कनिष्क (शासनकाल)
2. क+वन-कुण्डलवन (स्थान)
में-silent
3. अ+ब-अश्वघोस/बसुमित्र/वसुमित्र (अध्यक्ष)
बौद्ध सभा- बौद्ध सभा अर्थात 4 बौद्ध सभाओं को याद करने कि ट्रिक
करेंगे-silent

महत्त्वपूर्ण तथ्य :
1. चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद बौद्धधर्म दो भागो हीनयान एवं महायान में विभाजित हो गया।
2. धार्मिक जुलुस का प्रारम्भ सबसे पहले बौद्धधर्म के द्वारा प्रारम्भ किया गया। बौद्धों का सबसे पवित्र त्यौहार वैशाख पूर्णिमा है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इसका महत्त्व इसलिए है कि बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई।
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3. बौद्धधर्म के त्रिरत्न है- बुद्ध, धम्म एवं संघ।
4. 'विश्व दुखों से भरा है' का सिद्धांत बुद्ध ने उपनिषद् से लिया है।
5. बौद्धधर्म के बारे में हमें विशद ज्ञान "पाली त्रिपिटक" प्राप्त होता है।
6. बौद्धधर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे। इन्हे एशिया का ज्योति पुञ्ज (Light of Asia)  कहा जाता है। इनका जन्म 563 ई.पू. में कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था, इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
7. इनके पिता शुद्धोधन शाक्य गण के मुखिया थे। माता मायादेवी की मृत्यु इनके जन्म के सातवे दिन हो गयी थी। इनका लालन-पालन इनकी सौतेली माँ प्रजापति गौतमी ने किया।
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8. बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पाली में दिए थे।
9. इनके प्रमुख अनुयायी शासक थे- बिम्बिसार, प्रसेनजित तथा उदयन।
10. एक अनुश्रुति के अनुसार मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषो को आठ भागों में बाँटकर उन पर आठ स्तूपो का निर्माण कराया गया।
(उन आठ स्तूपो में से एक साँची का स्तूप,मध्य प्रदेश है।)

-By Singh

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