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अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न से सम्मानित : समान्य ज्ञान

अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 27 मार्च, 2015 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके घर पर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति भवन में दिए जाने की परंपरा है, लेकिन बीमारी के चलते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल से हटकर उन्हें घर जाकर यह सम्मान दिया। 1998 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी बीमारी के चलते काफी समय से सार्वजनिक जीवन से दूर हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। 
ग्वालियर में 25 दिसंबर, 1924 को जन्मे वाजपेयी पहले जनसंघ फिर बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष रहे। तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने, जिनका कांग्रेस पार्टी से कभी नाता नहीं रहा। साथ ही वह कांग्रेस के अलावा के किसी अन्य दल के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरे से जुडे होने के बावजूद वाजपेयी की एक धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी छवि है। उनकी लोकप्रियता भी दलगत सीमाओं से परे है।
करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि के रुप में प्रख्यात वाजपेयी को साहसिक पहल के लिए भी जाना जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री के रुप में उनकी 1999 की ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा शामिल है, जब पाकिस्तान जाकर उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
वाजपेयी और प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं स्वतंत्रता सेनानी महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा 24 दिसम्बर को की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि वाजपेयी और मालवीय दोनों का जन्मदिन 25 दिसंबर है। वाजपेयी का जन्म इस तारीख को 1924 में और मालवीय का जन्म 1861 को हुआ था।
महामना को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। उनके परिजनों को 30 मार्च को राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार दिया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मालवीय इस पुरस्कार से नवाजे जाने वाली 44वीं व 45वीं हस्ती हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी-
जन्म : 25 दिसंबर, 1924, ग्वालियर
पिता : श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी
माता : श्रीमती कृष्णा देवी
शिक्षा : स्नातकोत्तर (राजनीति शास्त्र)
राज​नीति : 1957 में पहली बार बलरामपुर, उत्तर प्रदेश लोकसभा सीट से सांसद बने। वे चौथी, 5वीं, 6वीं, 7वीं और फिर 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा के सदस्य रहे। वह 1962 और 1986 में दो बार राज्यसभा के लिए भी चुने गए। वह इकलौते ऐसे सांसद हैं, जो भिन्न-भिन्न समय में चार राज्यों–उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली लोकसभा सीटों से चुने गए।
प्रधानमंत्री : 16–31 मई, 1996 एवं 19 मार्च, 1998 से 13 मई, 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान मिला। राष्ट्रीय राजनीति के साथ उनका पहला परिचय 1942 में हुआ, जब उन्होंने छात्र जीवन के दौरान 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया।
राष्ट्रधर्म (मासिक), पांचजन्य (साप्ताहिक) और स्वदेश व वीर अर्जुन (दैनिक) पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और संस्थापक अध्यक्ष बने।
भारत रत्न से सम्मानित प्रधानमंत्री-
पंडित जवाहर लाल नेहरू : 1955
लाल बहादुर शास्त्री : 1966 (मरणोपरांत)
इंदिरा गांधी : 1971
मोरारजी देसाई : 1991
राजीव गांधी : 1991 (मरणोपरांत)
अटल बिहारी वाजपेयी : 2014
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